"Go into yourself. Find out the reason that commands you to write; see whether it has spread its root into the very depths of your heart; confess to yourself whether you would have to die if you were forbidden to write." Rainier Maria Rilke, Letters to a Young Poet

Wednesday, February 22, 2012

Wo Raah...


काले अँधेरे सा फैला अकेलापन
और कभी बिस्तर की सलवटो में सिमटा सा


अनजान चेहरों में कभी
अपनों को ढूँढा करता है

रात बेरात जब भी आँखे बंद करती हु
उसे देखा करता है की जिसे
पहचाना नहीं अब तलक मैने

दिल की गहरायियो में रंज भी है
कही वफ़ा भी
सोच के की क्या यही अब से ज़िन्दगी है
हैरान भी हु और परेशान भी


कभी टटोलती, कभी संभलती,कभी खुद ही को समझाती हु
की वो राह जिसपर है जन्नत का नूर-ए-सबब

वो राह बस अगले मोड़ पर ही कही है ..

2 comments:

renu_milestogo said...

बेहतरीन लिखा है...
इतना कहना है तुझसे...
अब शक -शुबा की गुंजाईश ना रख
जो बढ़ गए कदम पीछे ना कर......
वफ़ा की राह पर धड़कने तेज़ हो जाती हैं...
बस दिल पे हाथ रख
दिल की सुन...दिल की कर.......

Dr Mandeep Khanuja said...

hmm beautifully said di,that's what i am doing waiting for 'the guiding light' to carry me through

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